23 जनवरी 2009

प्रवासी पक्षिओं पर देखें एक कार्टून


10 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा !! सुबह ही नई दुनिया में देखा था. मजेदार.

बवाल ने कहा…

हा हा !! मजे़दार, बहुत ही मज़ेदार डूबे साहब और हाँ जी एक बहुत ही गहरा कटाक्ष.

रंजन ने कहा…

सही कहा भीडू़!!

मजा आ गया

सुशील दीक्षित ने कहा…

nice

COMMON MAN ने कहा…

बहुत मजेदार, लेकिन दर्द भी दे रहा है यही हाल रहा तो पता नहीं भारत में कहां रहना पडे़गा.

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

सही तो कह रहे हैं :)

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

दूर की कौड़ी लाए हैं। बहुत अच्छा है।

संजय बेंगाणी ने कहा…

यह तो बड़ा मारक किस्म का हो गया. बहुत खूब.

seema gupta ने कहा…

" हा हा हा बेचारे पक्षियों को भी चिंता सताने लगी की तालाब की जगह ऊँची इमारत तो नही खडी हो गयी...."

Regards

cartoonist ABHISHEK ने कहा…

बहुत अच्छा और दिल को भीतर तक बेध देने की क्षमतावाला कार्टून है..
मेरे देश की विडंबना देखिये.. जहाँ तालाब हैं वहां "मकान" बन रहे हैं.. और
जहाँ घर हैं वहां "बाँध" बन रहे हें..